उलझे रिश्ते…

​तुम रूठे, मैं रूठा, फिर मनाएगा कौन ? आज दरार है, कल खाई होगी,  फिर फासलों को मिटायेगा कौन ? मैं चुप, तुम भी चुप, इस चुप्पी को फिर तोड़ेगा कौन ? मज़ाक को लगा लोगे दिल से ,  तो रिश्ता फिर निभाएगा कौन ? दुखी मैं भी और तुम भी बिछड़कर ,  तो सोचो … Continue reading उलझे रिश्ते…